Tag हक़ नहीं था फिर भी सब कुछ था

अहमियत

अहमियत इतनी दो कि अफ़सोस तुम्हें न हो और बोझ उसे लगे – भावनात्मक हिंदी कोट

अहमियत – आख़िरी हद तक 🖤 अहमियत इतनी दो कि अफ़सोस तुम्हें न हो रिश्तों में अहमियत क्यों भारी पड़ जाती है कुछ लोग रिश्ते निभाते नहीं,इस्तेमाल करते हैं— और जब इस्तेमाल पूरा हो जाए,तो निकलते वक्त दोष भी छोड़…

हक़ नहीं था, फिर भी सब कुछ था Part-1

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हक़ नहीं था Part-1 | जब सब कुछ शुरू हुआ कुछ कहानियाँ शोर से नहीं,ख़ामोशी से शुरू होती हैं। मेरी कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। वो कोई खास दिन नहीं था,न कोई खास जगह।बस एक आम-सी मुलाक़ात थी,जिसे मैंने…